'संवदिया' का अप्रैल-जून 2012 अंक नई छटा के साथ प्रकाशित हुआ है। कोसी अंचल के दिवंगत हिन्दी साहित्यकार डॉ. सत्येन्द्र निगम पर विशेष सामग्री के अलावा इसमें ललित निरंजन द्वारा प्राय: साठ साल पुराने फारबिसगंज मेला से जुड़ी संस्म़तियॉं 'काश, और वे लम्हे...' के नाम से प्रकाशित है। सत्येन्द्र निगम के व्यक्ितत्व और कृतित्व पर लिखा है सुशील कुमार श्रीवास्तव और अनिता रानी अन्नु ने। अंक में नज्म सुभाष, सीताराम पांडेय, विश्वनाथ प्रसाद श्रीवास्तव, देवेन्द्र कुमार मिश्रा और अमित कुमार लाडी की कहानियॉं प्रकाशित हैं, जबकि लीलारानी शबनम, सजीवन मयंक, असलम हसन, शंभुनाथ अरुणाभ, मांगन मिश्र मार्तण्ड, सुवंश ठाकुर अकेला, रवीश कुमार, सुशीला शर्मा, तारिक असलम तस्नीम, सुलभ जायसवाल, चेतना वर्मा, सुरेंद्र दीप, हितेश कुमार शर्मा एवं विजयशंकर द्विवेदी की कविताऍं।उपेंद्र प्रसाद राय, कविता किरण, सुकामारी अड़ोरा, प्राणमोहन प्रीतम, दीप विलासपुरी एवं एसएमएस अहमद की गजलों के साथ 'नवांकुर' स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित है पवन कुमार पारदर्शी की कविता। गजेंद्र कुमार (कालिदास एवं इनका महाकाव्य कुमारसंभवम) एवं रामचरण यादव (लोक साहित्य और भारतीय जीवनमूल्य) के आलेखों के साथ पुस्तक समीक्षा के अंतर्गत चार पुस्तकों की समीक्षाऍं प्रकाशित की गई हैं।संवदिया प्रकाशन, अररिया, बिहार द्वारा कोसी अंचल के वरिष्ठ कवि, कथाकार श्री भोला पंडित 'प्रणयी' के प्रधान संपादन में 'संवदिया' नामक त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन अक्तूबर 2004 से नियमित रूप से हो रहा है। आरंभ से ही पत्रिका के हर अंक में कोसी अंचल के किसी महत्वपूर्ण दिवंगत लेखक का परिचय, फोटो और उसके कृतित्व का आकलन करनेवाले लेख छापे जाने की परंपरा का निर्वाह इस पत्रिका ने निरंतर किया है।
Monday, June 11, 2012
संवदिया : अप्रैल-जून 2012
'संवदिया' का अप्रैल-जून 2012 अंक नई छटा के साथ प्रकाशित हुआ है। कोसी अंचल के दिवंगत हिन्दी साहित्यकार डॉ. सत्येन्द्र निगम पर विशेष सामग्री के अलावा इसमें ललित निरंजन द्वारा प्राय: साठ साल पुराने फारबिसगंज मेला से जुड़ी संस्म़तियॉं 'काश, और वे लम्हे...' के नाम से प्रकाशित है। सत्येन्द्र निगम के व्यक्ितत्व और कृतित्व पर लिखा है सुशील कुमार श्रीवास्तव और अनिता रानी अन्नु ने। अंक में नज्म सुभाष, सीताराम पांडेय, विश्वनाथ प्रसाद श्रीवास्तव, देवेन्द्र कुमार मिश्रा और अमित कुमार लाडी की कहानियॉं प्रकाशित हैं, जबकि लीलारानी शबनम, सजीवन मयंक, असलम हसन, शंभुनाथ अरुणाभ, मांगन मिश्र मार्तण्ड, सुवंश ठाकुर अकेला, रवीश कुमार, सुशीला शर्मा, तारिक असलम तस्नीम, सुलभ जायसवाल, चेतना वर्मा, सुरेंद्र दीप, हितेश कुमार शर्मा एवं विजयशंकर द्विवेदी की कविताऍं।उपेंद्र प्रसाद राय, कविता किरण, सुकामारी अड़ोरा, प्राणमोहन प्रीतम, दीप विलासपुरी एवं एसएमएस अहमद की गजलों के साथ 'नवांकुर' स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित है पवन कुमार पारदर्शी की कविता। गजेंद्र कुमार (कालिदास एवं इनका महाकाव्य कुमारसंभवम) एवं रामचरण यादव (लोक साहित्य और भारतीय जीवनमूल्य) के आलेखों के साथ पुस्तक समीक्षा के अंतर्गत चार पुस्तकों की समीक्षाऍं प्रकाशित की गई हैं।Thursday, March 1, 2012
संवदिया : जनवरी-मार्च 2012, संपूर्ण उपन्यास : सुन्नैर नैका

'संवदिया' का जनवरी-मार्च 2012 अंक विशेष आकर्षण लिए हुए है। इसमें युवा कथाकार एवं पत्रकार पुष्यमित्र का संपूर्ण उपन्यास 'सुन्नैर नैका' का प्रकाशन किया गया है, जो कोसी अंचल की एक बहुश्रुत लोककथा पर आधारित है। उपन्यास पर गिरीन्द्रनाथ झा और पशुपति शर्मा की टिप्पणियॉं भी प्रकाशित की गई हैं। पत्रिका का मुखपृष्ठ कोसी अंचल के प्रतिष्ठित कवि-आलोचक एवं संत साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान डॉ. महेश्वर प्रसाद सिंह के चित्र से सुसज्जित है और उनके रचनात्मक अवदान पर डॉ. देवेन्द्र कुमार देवेश का आलेख प्रकाशित किया गया है। डॉ. शिवनारायण द्वारा लिखित कलकत्ते का यात्रा वृत्तांत भी मर्म को छू लेनेवाला है।
Tuesday, November 29, 2011
'संवदिया' का अमोघ स्मृति अंक : जुलाई-दिसंबर 2011

संवदिया' त्रैमासिक पत्रिका का नवीनतम संयुक्तांक (जुलाई-दिसंबर 2011) मूर्धन्य कवि पंडित अमोघ नारायण झा अमोघ की स्मृति में 'अमोघ स्मृति अंक' के रूप में प्रकाशित हुआ है। इसके लेखकों में शामिल हैं : मैनेजर पांडेय, खगेन्द्र ठाकुर, श्रीरंजन सूरिदेव, कर्मेन्दु शिशिर, कमला प्रसाद बेखबर, विद्यानारायण ठाकुर, इंदुशेखर, लखनलाल सिंह आरोही, मोतीलाल शर्मा, अनुज प्रभात, बसंत कुमार राय, मांगन मिश्र मार्तण्ड, बलदेव प्रसाद सिंह, भोला पंडित प्रणयी, अनिता रानी अन्नु, सत्येन्द्र निगम आदि। अंक में अमोध जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विभिन्न संस्मरणात्मक एवं समालोचनात्मक लेखों का अद्भुत सगम है। साथ ही उनके द्वारा लिखित तथा उन्हें प्राप्त कुछ पत्रों को भी अंक में शामिल किया गया है। कवि अमोघ की रचनाओं में उनकी गीत-कविताओं के अलावा रेणु और नागार्जुन संबंधी उनके अद्भुत संस्मरण के साथ उनके स्वयं के बचपन की स्मृतियॉं शामिल हैं।
Friday, August 19, 2011
संवदिया : अप्रैल-जून 2011, दलित विमर्श पर विशेष सामग्री
'संवदिया' के अप्रैल-जून 2011 का अंक विशेष रूप से दलित विमर्श पर केन्द्रित है। इसमें डॉ. सुरेन्द्र स्निग्ध, दिलीप मंडल और डॉ. कामेश्वर पंकज के आलेख हिन्दी में दलित लेखन और नौकरशाही में दलित-पदों के प्रवेश पर आधारित विमर्श को नए आयाम देते हैं। पत्रिका का मुखपृष्ठ स्मृतिशेष हिन्दी कवि जानकीवल्लभ शास्त्री के नयनाभिराम चित्र से सुसज्जित है। कोसी अंचल के स्मृतिशेष साहित्यकार विद्यानारायण ठाकुर पर स्मिता झा एवं संजीव रंजन के आलेख प्रकाशित हैं, जबकि शास्त्री जी पर देवेन्द्र कुमार देवेश द्वारा लिखित संस्मरण। अन्य आलेखों में असलम हसन का लेख 'प्राचीन इतिहास के जिन्दा साक्ष्यों की खोज में' तथा अमरदीप का लेख 'कविता में बाजार का प्रवेश' महत्वपूर्ण हैं। राजकमल चौधरी की स्मृतिशेष पत्नी शशिकांता चौधरी पर देवशंकर नवीन का संक्षिप्त लेख भी उल्लेखनीय है।
पत्रिका की अन्य सामग्रियों में निरुपमा राय, रफी हैदर अंजुम एवं विभा देवसरे की कहानियॉं तथा श्यामसुंदर घोष, इंदुशेखर, राजकुमार कुंभज, सुशीला झा, केशवशरण, मंजुश्री वात्स्यायन, नवनीत कुमार, संजीव ठाकुर, मनोज कुमार झा, दिव्या तोमर और सुरेन्द्र कुमार की कविताऍं शामिल हैं। पुस्तक समीक्षाऍं तथा अन्य स्थायी स्तंभ तो हैं ही।
पत्रिका की अन्य सामग्रियों में निरुपमा राय, रफी हैदर अंजुम एवं विभा देवसरे की कहानियॉं तथा श्यामसुंदर घोष, इंदुशेखर, राजकुमार कुंभज, सुशीला झा, केशवशरण, मंजुश्री वात्स्यायन, नवनीत कुमार, संजीव ठाकुर, मनोज कुमार झा, दिव्या तोमर और सुरेन्द्र कुमार की कविताऍं शामिल हैं। पुस्तक समीक्षाऍं तथा अन्य स्थायी स्तंभ तो हैं ही।
Tuesday, March 8, 2011
संवदिया : जनवरी-मार्च 2011, फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन पर विशेष
'संवदिया' का नवीनतम अंक जनवरी-मार्च 2011, फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन पर विशेष सामग्री के साथ प्रकाशित हुआ है। 1955-56 में डॉ. मधुकर गंगाधर के नाम लिखे गए फणीश्वरनाथ रेणु के चार लंबे पत्र इस अंक का खास आकर्षण हैं, जो पहली बार हिन्दी साहित्य संसार के सामने आए हैं। नागार्जुन के काव्य में मिथिला के लोकजीवन का दिग्दर्शन कराता डॉ. वरुण कुमार तिवारी का लेख भी महत्वपूर्ण है। रेणु की रचनाओं पर बनी फिल्मों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है कर्नल अजित दत्त ने। अन्य सामग्रियों में डॉ. फरहत आरा (वहाजुद्दीन सिद्दीकी पर), रामखेलावन प्रजापति (खेदनप्रसाद चंचल पर), संजीवरंजन (मणिपुर पर) के लेख, श्री सुखदेव नारायण का संस्मरण, श्यामल, डॉ. धर्मदेव तिवारी, भोला पंडित प्रणयी, नरेन्द्र तोमर, लीलारानी शबनम, चेतना वर्मा, अर्पण कुमार, स्नेहा किरण, विभुराज चौधरी आदि की कविताऍं तथा रहबान अली राकेश, प्रभात दुबे, अरुण अभिषेक एवं इंदिरा डांगी की कहानियॉं शामिल हैं। समीक्षा आदि स्तंभ तो हैं ही।
Tuesday, December 28, 2010
'संवदिया' : अक्टूबर-दिसंबर 2010, सरहपा और बालसाहित्य पर केन्द्रित

'संवदिया' का अक्टूबर-दिसंबर 2010 का अंक सिद्ध सरहपा और बालसाहित्य पर विशेष रूप से केन्द्रित है। पत्रिका में प्रकाशित डॉ. देवेन्द्र कुमार देवेश की टिप्पणी में उन्हें कोसी अंचल का कवि बताया गया है। ध्यातव्य है कि सरहपा हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं। पत्रिका में प्रतिष्ठित विद्वान डॉ. विश्वंभरनाथ उपाध्याय द्वारा लिखित 'सरहपा का दर्शन और कविता' शीर्षक खास आलेख प्रकाशित है। साहित्य अकादेमी द्वारा भारतीय भाषाओं में प्रकाशित बालसाहित्य की श्रेष्ठ कृतियों के लिए 2010 से बालसाहित्य पुरस्कार आरंभ किए गए हैं। हिन्दी में यह पुरस्कार डॉ. प्रकाश मनु को तथा मैथिली में कोसी अंचल के प्रतिष्ठित लेखक तारानंद वियोगी को प्रदान किए गए हैं। पत्रिका के इस अंक में पुरस्कार प्राप्ित के अवसर पर दिए गए उनके वक्तव्यों को प्रकाशित किया गया है। प्रधान संपादक भोला पंडित प्रणयी का संपादकीय राष्ट्रभाषा हिन्दी के महत्व पर केन्द्रित है, जबकि संपादक अनीता पंडित ने अपने संपादकीय में कोसी केन्द्रित वेबपेजों/ब्लॉगों पर चर्चा की है।
इस अंक में प्रकाशित अन्य महत्वपूर्ण रचनाऍं हैं : डॉ. रमेशचंद्र शाह की डायरी के अंश, 'कथा कोसी' (बच्चा यादव द्वारा संपादित विशिष्ट कहानी-संग्रह) पर समीक्षात्मक आलेख, रंजू कुमारी द्वारा लिखित आलेख 'भारत के विभन्न कला रूपों में चिकित्सा व स्वास्थ्य', डॉ. तारिक असलम 'तस्नीम' और रतन वर्मा की कहानियॉं, ओमप्रकाश कश्यप के शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास 'दंश' का एक अंश तथा तीन महत्वपूर्ण आलेख - लोक संस्कृति की लय है कजरी (कृष्ण कुमार यादव), बाल कुपोषण एवं महिलाऍं (विमला कुमारी) एवं द्वितीय विश्वयुद्ध, आजाद हिन्द फौज एवं भारत (संजीव रंजन)।
पत्रिका में राजेश्वरी पंडित की लघुकथाऍं और 'चल नदिया के पार' (सुबोध कुमार सुधाकर का गीत संग्रह), 'गीतमाला' (पद्मानंद की कविताऍं) 'अंधेरों से मुठभेड़' (भोला पंडित प्रणयी का गजल संग्रह) और 'अफसोस के लिए कुछ शब्द' (डॉ. अरविन्द श्रीवास्तव का कविता संग्रह) की समीक्षाऍं भी प्रकाशित हैं।
'संवदिया' के इस अंक में शामिल कविताओं के कवि हैं - ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग, रमेश कुमार रमण, सत्येन्द्र शशि, विमलेश त्रिपाठी, नवनीत कुमार, प्रमोद पंडित, सुरेन्द्र कुमार, निशांत, राजेशचंद्र, विजयशंकर द्विवेदी और आदर्श कुमार इंकलाब।
Friday, September 24, 2010
'संवदिया' : जुलाई-सितंबर 2010, रामनारायण तूफान पर विशेष

'संवदिया' का जुलाई-सितंबर 2010 का अंक कुछ देर से प्रकाशित हुआ है। यह अंक विशेष रूप से कोसी अंचल के स्वतंत्रता सेनानी, रंगकर्मी नाटककार रामनारायण तूफान पर केन्द्रित है। अंक में उनके ग्रामीण युवा रंगकर्मी नाटककार अखिलेश अखिल द्वारा लिखित आलेख के साथ-साथ रामनारायण तूफान का आत्मकथ्य 'मेरी जीवन-यात्रा' प्रकाशित किया गया है।
अंक की अन्य विशिष्ट सामग्री है, राम शिव मूर्ति यादव द्वारा जाति आधारित जनगणना की अनिवार्यता पर लिखा गया आलेख, जिसमें उन्होंने पर्याप्त ऑंकड़े और तर्क प्रस्तुत करते हुए जाति आधारित जनगणना को अनिवार्य बताया है। अंक की अन्य सामग्रियों में हैं--हरि दिवाकर की कहानी 'हैप्पी न्यू ईयर' जवाहर किशोर प्रसाद की 'एहसास की नई सुबह', लव शर्मा प्रशांत की 'टूटते रिश्ते' और सुभाष नज्म की 'मेरा कसूर क्या था'।
अंक में प्रकाशित अन्य महत्वपूर्ण आलेख हैं--'राजधानी दिल्ली' (कर्नल अजित दत्त) और 'त्रिपुरा दर्शन' (संजीव रंजन)। इनके अलावा अंक का मुख्य आकर्षण है--शांति सुमन, श्याम सुंदर घोष, भोला पंडित प्रणयी, जोगेश्वर जख्मी, खेदन प्रसाद चंचल और शिवनारायण शर्मा व्यथित के गीत तथा अनुज प्रभात, रेखा व्यास, देवेन्द्र कुमार मिश्रा, एस. एम. एस. अहमद और मिथिलेश आदित्य की कविताऍं। अंक में शांति सुमन के कृतित्व पर प्रकाशित पुस्तक की लंबी समीक्षा भी प्रकाशित की गई है, जो मधुसूदन साहा के द्वारा लिखी गई है।
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