
'संवदिया' का अप्रैल-जून, 2010 के अंक में बांग्ला के प्रतिष्ठित कथाकार सतीनाथ भादुड़ी डॉ. उत्तिमा केशरी द्वारा लिखा एक विशेष लेख प्रकाशित है, साथ ही सतीनाथ भादुड़ी और फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यासों के साम्य को लेकर रेणु की मौलिकता पर उठे विवाद पर एक लेख 'रेणु की मौलिकता' (धनंजय कुमार) भी पठनीय है। हिन्दी में दलित साहित्य के वर्तमान परिदृश्य को रेखांकित करता ओमप्रकाश कश्यप का आलेख भी महत्वपूर्ण है। अन्य आलेखों में 'बाबा तिलकामांझी' (कर्नल अजित दत्त), 'बंकरवाली ट्रेन' (संजीव रंजन), 'युवा और साहित्य' (रामचंद्र प्रसाद यादव), भारतीय संस्कृति...(अशोक सिंह तोमर) शामिल हैं।
इस अंक में सुदर्शन वशिष्ठ, धर्मदेव तिवारी तथा सरला अग्रवाल की कहानियॉं तथा रमेशचंद्रशाह, सकलदेव शर्मा, नरेन्द्र तोमर, अशोक गुप्ता, हरिनारायण नवेन्दु, सुवंश ठाकुर अकेला, मदनमोहन उपेन्द्र, सुरेंद्र दीप, तारिक असलम तस्नीम, संजीव ठाकुर, रमेश प्रजापति, रेखा चौधरी, शैलबाला कुमारी, देव नूतन आनंद, राजू गीरापु, सूरज तिवारी मलय, संजीव प्रसाद श्रीवास्तव एवं सुरंन्द्र कुमार सुमन की कविताऍं शामिल हैं, साथ ही हारून रशीद गाफिल, मुश्ताक सदफ, शफक रऊफ एवं सदफ रऊफ की गजलें भी।